प्रेरक कथा कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Motivational Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations a...Read More


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  • पहली कहानी

    उस रात विनय के सामने एक खाली कागज था और भीतर सवालों का पूरा जंगल।बाहर बारिश हो र...

  • કુત્રિમ બુદ્ધિમતા - 2

                              :  પ્રકરણ - 2 :             ભગવાન! તું આ દુનિયાનો તારણ...

प्रेरणास्पंदन 2 - 6-7 By Bhupendra Kuldeep

अध्याय:06अधूरा कैनवास और सुनहरी सीख शहर की सबसे बड़ी आर्ट गैलरी 'नक्श' में उस शाम भारी भीड़ थी। सस्पेंसइस बात का था कि इस साल का 'सर्वश्रेष्ठ कलाकार' पुरस्कार किसेम...

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प्रेरणास्पंदन - 40-41-42-43 By Bhupendra Kuldeep

अध्याय:40फ्रीसाइकिलिंग—उपयोगिता और उदारता काअनूठा मेल                वर्तमान समय में जब हम पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों केउचित प्रबंधन की बात करते हैं, तो हमारे सामने कई नवीन अवधार...

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वो मासूम सी लड़की - 5 By Vandna Sharma

एक दिन पीहू अपने परिवार के साथ हरिद्वार गई। तीनों एक घाट पर बैठे थे, नदी में पैर डाले, आसमान में डूबते सूरज को देख रहे थे। पानी सोने जैसा चमक रहा था, आरती की घंटियाँ बज रही थीं।तभी...

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संघर्ष और संकल्प - 3 By shiromani mathur

*हम सुधरेंगे – जग सुधरेगा*                         मंदिर में चल रहे सत्संग में सुरजा बहुत देर से आई तो ममता ने पूछा – सुरजा अभी तक क्या कर रही थी, जो इतना देर से आई ? सुरजा बोली –...

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पहली कहानी By Raam

उस रात विनय के सामने एक खाली कागज था और भीतर सवालों का पूरा जंगल।बाहर बारिश हो रही थी। छत से टपकती बूँदें किसी पुराने गीत की तरह एक ही लय में गिर रही थीं। मेज पर रखी चाय ठंडी हो चु...

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हिम्मत के रंग By Vijay Erry

हिम्मत के रंग लेखक: विजय शर्मा एरीगाँव के किनारे बसे छोटे-से घर में रवि अपने पिता के साथ रहता था। माँ की मृत्यु हुए कई वर्ष हो चुके थे। पिता जी एक साधारण किसान थे। खेत छोटे थे, फसल...

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अपना कौन By kantilal Rathod Badamiya

अपना कौन?जब दौलत चली गई, तब रिश्तों के असली चेहरे सामने आए…लेखक: Kantibhai Rathod Badamiya--- भूमिका — एक सवाल, जिसने पिता का दिल तोड़ दियाजिस पिता ने अपने बच्चों को उँगली पकड़कर च...

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अनकहे एहसास By kantilal Rathod Badamiya

अनकहे एहसासहर दर्द को शब्द नहीं मिलते, लेकिन हर एहसास की अपनी एक कहानी होती है।लेखक: कान्तिभाई राठौड़ 'बदामिया'--- इंट्रो — आपकी खामोशी भी कुछ कहती हैकभी ऐसा हुआ है कि आपके...

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ZERO TO BILLIONAIRE - 5 By Raju kumar Chaudhary

ZERO TO BILLIONAIREभाग 5: पिता का रहस्य और अरबों का षड्यंत्रलेखक: राजु कुमार चौधरीअध्याय 1: सुबह छह बजे का रहस्यसुबह के पाँच बजकर तीस मिनट हो चुके थे।आरव अपने कमरे की खिड़की के पास...

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गरीब के सपने भी बड़े होते हैं By Dharmpal Sroj

गरीब के सपने भी बड़े होते हैं: मेहनत, संघर्ष और उम्मीद की एक सच्ची कहानीहर गरीब के दिल में एक सपना होता हैदुनिया में हर इंसान के पास सपने होते हैं। कोई बड़े घर का सपना देखता है, को...

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रावण गाइड - भाग 3 By Rudra Rudrani

  यह भाग तुम्हारी रामायण-व्याख्या को आगे बढ़ाता है। कथा-परंपराओं में जहाँ विवरण अलग-अलग हैं, वहाँ उन्हें एक ही निर्विवाद तथ्य नहीं माना गया है।---10.1 — रावण के अंत की संभावना और उ...

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कल की बात By Vijay Erry

कल की बातलेखक: विजय शर्मा एरी(लगभग 2000 शब्द)रात के बारह बज रहे थे। कमरे में सिर्फ दीवार घड़ी की टिक-टिक और पंखे की धीमी आवाज़ थी। मैं अपने पुराने लकड़ी के डेस्क पर बैठा था। सामने...

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खुद को पहचानिए By kantilal Rathod Badamiya

खुद को पहचानिएदूसरों से आगे निकलने की नहीं, खुद को बेहतर बनाने की दौड़ में शामिल हो जाइए।लेखक: कान्तिभाई राठौड़ 'बदामिया'--- भूमिका — आपकी जिंदगी अभी बाकी है!एक सवाल अपने आ...

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उन्हें उनकी राह पर रहने दें By kantilal Rathod Badamiya

उन्हें उनकी राह पर रहने देंदूसरों को बदलने की कोशिश छोड़िए, अपनी शांति और जीवन को बेहतर बनाइएलेखक: कांतिभाई राठौड़ ‘बदामिया’---प्रस्तावना — जीवन की सबसे बड़ी सीखजीवन बहुत सुंदर है,...

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बेटी का पिता By kantilal Rathod Badamiya

बेटी का पिताएक पिता का प्रेम, बेटी की मजबूरी और पछतावे की भावुक कहानीलेखक: कांतिभाई राठौड़ ‘बदामिया’---समर्पणयह कहानी उन सभी पिताओं को समर्पित है, जिनकी बेटियाँ विवाह के बाद दूसरे...

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ज़िंदगी की एक सच्ची बात By kantilal Rathod Badamiya

ज़िंदगी की एक सच्ची बात जिस दिन उसने चुप रहना सीख लिया… उस दिन उसकी ज़िंदगी बदल गईरमेश एक सीधा-सादा इंसान था। दिल का साफ़, दूसरों की मदद करने वाला और रिश्तों को दिल से निभाने वाला।...

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કુત્રિમ બુદ્ધિમતા - 2 By Ramesh Desai

                          :  પ્રકરણ - 2 :             ભગવાન! તું આ દુનિયાનો તારણ હાર છે.. એક મા બાપ એક સાથે પાંચથી વધારે સંતાનો ને સંભાળી શકતા નથી ત્યાં તું એકલ હાથે સમગ્ર દુન્યવી...

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कुत्रिम बुद्धिमता - 5 By Ramesh Desai

                      :  प्रकरण 5  :       मांकवा से वापस आने के बाद मेरे सभी घाव भर गये थे. बदले हुए माहौल से मैं स्वस्थ महसूस कर रहा था. छुट्टिया भी ख़त्म होने वाली थी.       मैं...

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नीली डायरी:संघर्षो के बीच बनी कवयित्री By Kritika Sharma

शहर के एक शांत और छोटे से कोने में बसी काव्या की दुनिया बहुत ही मासूम ह। जहाँ बाकी बच्चे रंग-बिरंगे खिलौनों और खेल-कूद में मग्न रहते हैं, वहीं काव्या की एक अलग ही दुनिया ह। उसकी एक...

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खुशी के आँसू By Vijay Erry

खुशी के आँसूलेखक: विजय शर्मा एरीरवि शर्मा एक साधारण से कस्बे का साधारण युवक था। उम्र तीस साल के आसपास। पिता सरकारी स्कूल में मास्टर थे, माँ गृहिणी। घर छोटा-सा, दो कमरों का, लेकिन द...

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एक उम्मीद का चमत्कार By kantilal Rathod Badamiya

एक उम्मीद का चमत्कार एक भावुक, प्रेरणादायक और इंसानियत से भरी कहानीउपशीर्षक: “जब इंसान किसी के दर्द का सहारा बनता है, तब ईश्वर की मौजूदगी महसूस होती है।”### प्रस्तावना — चमत्कार ब...

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रिटायरमेंट By Vandna Sharma

रिटायरमेंटप्रताप सिंह आज अपने आंगन में उदास लेटा था।आज उसकी रिटायरमेंट की पहली सुबह थी। जिस सुबह का उसे पिछले तीस साल से इंतजार था, जब वो फाइलों के बोझ से मुक्त होगा, जब कोई बॉस का...

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कभी धूप, कभी छाँव By Vijay Erry

कभी धूप, कभी छाँवलेखक: विजय शर्मा एरीगाँव के किनारे बसे छोटे-से घर में सुबह की पहली किरणें जब खिड़की से घुसतीं, तो रमेश को लगता था जैसे जीवन खुद आकर मुस्कुरा रहा हो। नीम के पेड़ की...

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500 रुपये का फटा नोट और वो आखिरी बस By Nisha Choudhary

"बेटा, जब जेब में फूटी कौड़ी न हो और सामने अपनों की उम्मीदें खड़ी हों, तब या तो इंसान हमेशा के लिए टूट जाता है... या फिर अपनी तकदीर खुद लिख देता है!"कहानी:रात के 11 बज रहे थे। दिल्...

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घुंघट के पट खोल By Vandna Sharma

कहानी - घूँघट के पट खोलविजय नगर का रेलवे स्टेशन। नाम बड़ा था, पर स्टेशन बहुत छोटा। पूरे दिन में दो ही गाड़ियाँ आती थीं। न चाय की दुकान, न स्टॉल। सन्नाटा इतना कि सीटी की आवाज दूर तक...

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ज़िंदगी का सच By Nisha Choudhary

क्या आपने कभी सोचा है कि जब इंसान अपनी ज़िंदगी के आखिरी पड़ाव पर खड़ा होता है, तो उसे सबसे ज़्यादा पछतावा किस बात का होता है? गँवाए हुए पैसों का... या छूटे हुए अपनों का?शहर के सबसे...

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आजाद परिंदे By Hakeem Shekh

बिहार…गंगा के किनारे बसे बिहार के एक छोटे से जिले से करीब पैंतीस किलोमीटर दूर एक गाँव था—देवपुरा।नाम भले ही देवपुरा था, लेकिन गाँव की हालत किसी से छिपी नहीं थी।चारों तरफ दूर-दूर तक...

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रोशनी की दस्तक - 3 By Nisha Choudhary

भाग 3: सच्चा ज्ञान और असली धनसोनू के पिता की बात सुनकर चौपाल पर गहरा सन्नाटा छा गया। रघुनाथ जी ने अपनी आँखें नीची कर लीं और कांपती हुई आवाज़ में बोले, "अगर आप लोगों को लगता है कि म...

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कलियुग की अग्निपरीक्षा By Skp divine

कलियुग की अग्निपरीक्षाआज हर इंसान किसी न किसी परीक्षा से गुजर रहा है…कहते हैं कि अग्नि केवल जलाती नहीं, बल्कि सोने को शुद्ध भी करती है।शायद इसी तरह जीवन की कठिनाइयाँ भी इंसान को तो...

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मेरी मंजिल By Vijay Erry

मेरी मंजिललेखक: विजय शर्मा एरीगाँव की धूल भरी सड़क पर सूरज ढल रहा था। आसमान में लाल-नारंगी रंग फैल गए थे। पंद्रह साल का रवि अपने स्कूल का बैग कंधे पर लटकाए, सिर झुकाए चल रहा था। उस...

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उधारी से बड़ी इंसानियत By kantilal Rathod Badamiya

उधारी से बड़ी इंसानियत“कुछ कर्ज़ पैसों के होते हैं… और कुछ कर्ज़ इंसानियत के।” प्रस्तावनाकभी-कभी जिंदगी हमें ऐसे मोड़ पर खड़ा कर देती है, जहाँ सामने दो रास्ते होते हैं—एक रास्ता कह...

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कुछ खास है By Vandna Sharma

कहानी - कुछ खास हैनेहा की ननद रीना आई थी। बस के लंबे सफर के बाद भी रीना इतनी ऊर्जावान, इतनी खुश लग रही थी जैसे अभी पार्लर से आई हो। घर आते ही पूरे घर में रौनक हो गई। नेहा ने खुशी-ख...

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प्रेरणास्पंदन 2 - 6-7 By Bhupendra Kuldeep

अध्याय:06अधूरा कैनवास और सुनहरी सीख शहर की सबसे बड़ी आर्ट गैलरी 'नक्श' में उस शाम भारी भीड़ थी। सस्पेंसइस बात का था कि इस साल का 'सर्वश्रेष्ठ कलाकार' पुरस्कार किसेम...

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प्रेरणास्पंदन - 40-41-42-43 By Bhupendra Kuldeep

अध्याय:40फ्रीसाइकिलिंग—उपयोगिता और उदारता काअनूठा मेल                वर्तमान समय में जब हम पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों केउचित प्रबंधन की बात करते हैं, तो हमारे सामने कई नवीन अवधार...

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वो मासूम सी लड़की - 5 By Vandna Sharma

एक दिन पीहू अपने परिवार के साथ हरिद्वार गई। तीनों एक घाट पर बैठे थे, नदी में पैर डाले, आसमान में डूबते सूरज को देख रहे थे। पानी सोने जैसा चमक रहा था, आरती की घंटियाँ बज रही थीं।तभी...

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संघर्ष और संकल्प - 3 By shiromani mathur

*हम सुधरेंगे – जग सुधरेगा*                         मंदिर में चल रहे सत्संग में सुरजा बहुत देर से आई तो ममता ने पूछा – सुरजा अभी तक क्या कर रही थी, जो इतना देर से आई ? सुरजा बोली –...

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पहली कहानी By Raam

उस रात विनय के सामने एक खाली कागज था और भीतर सवालों का पूरा जंगल।बाहर बारिश हो रही थी। छत से टपकती बूँदें किसी पुराने गीत की तरह एक ही लय में गिर रही थीं। मेज पर रखी चाय ठंडी हो चु...

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हिम्मत के रंग By Vijay Erry

हिम्मत के रंग लेखक: विजय शर्मा एरीगाँव के किनारे बसे छोटे-से घर में रवि अपने पिता के साथ रहता था। माँ की मृत्यु हुए कई वर्ष हो चुके थे। पिता जी एक साधारण किसान थे। खेत छोटे थे, फसल...

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अपना कौन By kantilal Rathod Badamiya

अपना कौन?जब दौलत चली गई, तब रिश्तों के असली चेहरे सामने आए…लेखक: Kantibhai Rathod Badamiya--- भूमिका — एक सवाल, जिसने पिता का दिल तोड़ दियाजिस पिता ने अपने बच्चों को उँगली पकड़कर च...

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अनकहे एहसास By kantilal Rathod Badamiya

अनकहे एहसासहर दर्द को शब्द नहीं मिलते, लेकिन हर एहसास की अपनी एक कहानी होती है।लेखक: कान्तिभाई राठौड़ 'बदामिया'--- इंट्रो — आपकी खामोशी भी कुछ कहती हैकभी ऐसा हुआ है कि आपके...

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ZERO TO BILLIONAIRE - 5 By Raju kumar Chaudhary

ZERO TO BILLIONAIREभाग 5: पिता का रहस्य और अरबों का षड्यंत्रलेखक: राजु कुमार चौधरीअध्याय 1: सुबह छह बजे का रहस्यसुबह के पाँच बजकर तीस मिनट हो चुके थे।आरव अपने कमरे की खिड़की के पास...

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गरीब के सपने भी बड़े होते हैं By Dharmpal Sroj

गरीब के सपने भी बड़े होते हैं: मेहनत, संघर्ष और उम्मीद की एक सच्ची कहानीहर गरीब के दिल में एक सपना होता हैदुनिया में हर इंसान के पास सपने होते हैं। कोई बड़े घर का सपना देखता है, को...

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  यह भाग तुम्हारी रामायण-व्याख्या को आगे बढ़ाता है। कथा-परंपराओं में जहाँ विवरण अलग-अलग हैं, वहाँ उन्हें एक ही निर्विवाद तथ्य नहीं माना गया है।---10.1 — रावण के अंत की संभावना और उ...

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कल की बात By Vijay Erry

कल की बातलेखक: विजय शर्मा एरी(लगभग 2000 शब्द)रात के बारह बज रहे थे। कमरे में सिर्फ दीवार घड़ी की टिक-टिक और पंखे की धीमी आवाज़ थी। मैं अपने पुराने लकड़ी के डेस्क पर बैठा था। सामने...

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खुद को पहचानिए By kantilal Rathod Badamiya

खुद को पहचानिएदूसरों से आगे निकलने की नहीं, खुद को बेहतर बनाने की दौड़ में शामिल हो जाइए।लेखक: कान्तिभाई राठौड़ 'बदामिया'--- भूमिका — आपकी जिंदगी अभी बाकी है!एक सवाल अपने आ...

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उन्हें उनकी राह पर रहने दें By kantilal Rathod Badamiya

उन्हें उनकी राह पर रहने देंदूसरों को बदलने की कोशिश छोड़िए, अपनी शांति और जीवन को बेहतर बनाइएलेखक: कांतिभाई राठौड़ ‘बदामिया’---प्रस्तावना — जीवन की सबसे बड़ी सीखजीवन बहुत सुंदर है,...

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बेटी का पिता By kantilal Rathod Badamiya

बेटी का पिताएक पिता का प्रेम, बेटी की मजबूरी और पछतावे की भावुक कहानीलेखक: कांतिभाई राठौड़ ‘बदामिया’---समर्पणयह कहानी उन सभी पिताओं को समर्पित है, जिनकी बेटियाँ विवाह के बाद दूसरे...

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ज़िंदगी की एक सच्ची बात By kantilal Rathod Badamiya

ज़िंदगी की एक सच्ची बात जिस दिन उसने चुप रहना सीख लिया… उस दिन उसकी ज़िंदगी बदल गईरमेश एक सीधा-सादा इंसान था। दिल का साफ़, दूसरों की मदद करने वाला और रिश्तों को दिल से निभाने वाला।...

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एक उम्मीद का चमत्कार By kantilal Rathod Badamiya

एक उम्मीद का चमत्कार एक भावुक, प्रेरणादायक और इंसानियत से भरी कहानीउपशीर्षक: “जब इंसान किसी के दर्द का सहारा बनता है, तब ईश्वर की मौजूदगी महसूस होती है।”### प्रस्तावना — चमत्कार ब...

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कभी धूप, कभी छाँव By Vijay Erry

कभी धूप, कभी छाँवलेखक: विजय शर्मा एरीगाँव के किनारे बसे छोटे-से घर में सुबह की पहली किरणें जब खिड़की से घुसतीं, तो रमेश को लगता था जैसे जीवन खुद आकर मुस्कुरा रहा हो। नीम के पेड़ की...

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500 रुपये का फटा नोट और वो आखिरी बस By Nisha Choudhary

"बेटा, जब जेब में फूटी कौड़ी न हो और सामने अपनों की उम्मीदें खड़ी हों, तब या तो इंसान हमेशा के लिए टूट जाता है... या फिर अपनी तकदीर खुद लिख देता है!"कहानी:रात के 11 बज रहे थे। दिल्...

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कहानी - घूँघट के पट खोलविजय नगर का रेलवे स्टेशन। नाम बड़ा था, पर स्टेशन बहुत छोटा। पूरे दिन में दो ही गाड़ियाँ आती थीं। न चाय की दुकान, न स्टॉल। सन्नाटा इतना कि सीटी की आवाज दूर तक...

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ज़िंदगी का सच By Nisha Choudhary

क्या आपने कभी सोचा है कि जब इंसान अपनी ज़िंदगी के आखिरी पड़ाव पर खड़ा होता है, तो उसे सबसे ज़्यादा पछतावा किस बात का होता है? गँवाए हुए पैसों का... या छूटे हुए अपनों का?शहर के सबसे...

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मेरी मंजिल By Vijay Erry

मेरी मंजिललेखक: विजय शर्मा एरीगाँव की धूल भरी सड़क पर सूरज ढल रहा था। आसमान में लाल-नारंगी रंग फैल गए थे। पंद्रह साल का रवि अपने स्कूल का बैग कंधे पर लटकाए, सिर झुकाए चल रहा था। उस...

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उधारी से बड़ी इंसानियत By kantilal Rathod Badamiya

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